sprituality

हनुमान जी की वीरता

(1) ‘रामकी कृपासे पार उदधि अपार हुआ,दर्शसे तुम्हारे अम्ब! जीवन सफल ये।दानवों सहित नष्ट-भ्रष्ट कर दूॅं, जो कहोपस्त कर दूॅं, मैं अभी लंकाके महल ये।भूख भी लगी है, जाश रोष…