sitaram

श्रीहनुमान जी को सम्पाति द्वारा माता सीता का पता लगने पर अत्यन्त प्रसन्नता हुई। अद्भुद प्रसंग।

श्रीजनकनन्दिनी की खोज में वानर-भालू लगे हुये थे। अत्यधिक श्रम के साथ खोज करने पर भी दशानन या श्रीसीताजी का कहीं पता ही नहीं चल पा रहा था। थके हुए…

श्रीहनुमानजी की स्वयम्प्रभा से भेंट कहां हुई थी?

श्री हनुमानजी जी अपनी सेना वानर-दल, भालुओं के साथ माँ सीता की खोज करते हुए विन्ध्याचल पर्वत के पास वन में पहुँचे। उस निबिड़ वन में कण्टकाकीर्ण सूखे वृक्षों के…

माता सीता के ठिकाने का पता लगाने जाते समय हनुमानजी ने प्रभु को हृदय में बिठाकर श्रीराम नाम जप करते हुए लंका के लिये प्रस्थान किया था।

मृगचर्म और जटा-मुकुट से सुशोभित सजल-जलद-वपु भगवान् श्रीराम गुफा के द्वार पर एक शिला खण्ड पर बैठे उदास मन से पक्षियों को देख रहे थे। दूर से शन्तमूर्ति श्रीरघुनाथजी का…

त्रेता में श्रीराम अवतारी, द्वापर में श्रीकृष्णमुरारी और कलयुग में श्रीहनुमान प्रतिज्ञाधारी।

भगवान् श्रीराम जब समुद्र पारकर लंका जानेे के लिये समुद्र पर पुल बाँधने में संलग्न हुए, जब उन्होंने समस्त वानरों को संकेत किया कि ‘वानरो! तुम पर्वतों से पर्वत-खण्ड लाओ…

‘रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि’

अध्यात्म से यदि कोई व्यक्ति थोड़ा सा भी जुड़ा है तो उसने उपरोक्त श्लोक की पंक्ति को जरूर पढ़ा या सुना होगा। श्रीरामचरित मानस का यह श्लोक अद्वितीय है। सम्पूर्ण…

रामेश्वरम् में हनुमानजी को मिला था श्रीरामजी का आर्शीवाद।

दक्षिण के रामेश्वरम में स्थित रामनाथ स्वामी मंदिर भारत के महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में से एक है। बारह ज्योतिर्लिंग में से एक यह मंदिर तीर्थयात्रा का विशेष स्थान माना जाता…

श्रीराम-लक्ष्मण व हनुमानजी का प्रथम मिलन!अदभुद प्रसंग।

पिताकी आज्ञा का पालन करने के लिये दशरथनन्दन श्रीराम अपनी सती सहधर्मिणी जनकनन्दिनी और अनुज लक्ष्मण के साथ वन में गये। वे चित्रकूट और दण्डकारण्य में तेरह वर्षो तक ऋषियों-महर्षियों…

मंगल-मूरति मारूत-नन्दन

श्रीहनुमानजी के प्रति शंकाओं का स्पष्ट समाधान प्रमाणिक उदाहरण सहित । श्रीहनुमानजी के प्रति इस धरा में कई प्रकार की भ्रामक शंकायें अन्जान लोंगों द्वारा उत्पन्न कर दी गयीं। इन…

श्रीहनुमानजी सुग्रीव-के सचिव थे, बाली से कैसे बचाया? गुरूदक्षिणा में दिये बचन को कैसे निभाया।

ऋक्षरजा के दो पुत्र थे-बाली और सुग्रीव। पिता अपने दोनों पुत्रों को समान रूप से प्यार करते थें। दोनों बालक अत्यन्त धीर, बीर, बलवान्, बृद्धिमान् एवं सुन्दर तो थे ही,…

मूर्ति-कला में श्री हनुमान का संकटमोचक रूप

श्रीराम के अनन्य भक्त के रूप में श्रीहनुमानजी का नाम प्रख्यात है। अत्याचार के प्रतिनिधि रावण तथा उसके सयोगियों के दमन में श्री हनुमानजी ने निस्संदेह अतुलित बल का परिचय…