hanuman ji real stories

श्रीरामनाम महिमा! रोम-रोम में बसे श्रीराम।

भगवान् मर्यादा पुरूतोत्तम श्रीराम का राज्याभिषेक सम्पन्न हो रहा था। इसलिए राजाधिराज अयोध्या सम्राट को सब माण्डलिक नरेश अपनी भेंटें समर्पित कर रहे थे। विभीषण जी ने भी बड़े प्रेम…

श्रीहनुमान जी को सम्पाति द्वारा माता सीता का पता लगने पर अत्यन्त प्रसन्नता हुई। अद्भुद प्रसंग।

श्रीजनकनन्दिनी की खोज में वानर-भालू लगे हुये थे। अत्यधिक श्रम के साथ खोज करने पर भी दशानन या श्रीसीताजी का कहीं पता ही नहीं चल पा रहा था। थके हुए…

‘रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि’

अध्यात्म से यदि कोई व्यक्ति थोड़ा सा भी जुड़ा है तो उसने उपरोक्त श्लोक की पंक्ति को जरूर पढ़ा या सुना होगा। श्रीरामचरित मानस का यह श्लोक अद्वितीय है। सम्पूर्ण…

श्रीराम-लक्ष्मण व हनुमानजी का प्रथम मिलन!अदभुद प्रसंग।

पिताकी आज्ञा का पालन करने के लिये दशरथनन्दन श्रीराम अपनी सती सहधर्मिणी जनकनन्दिनी और अनुज लक्ष्मण के साथ वन में गये। वे चित्रकूट और दण्डकारण्य में तेरह वर्षो तक ऋषियों-महर्षियों…

विश्वास के स्वरूप श्रीहनुमानजी

हमारे भारत के छोटे-से छोटे और बड़े-से-बड़े, किसी भी नगर में आप जायेंगे तो वहाँ आपको कहीं-न-कहीं श्रीहनुमानजी का मन्दिर अवश्य देखने को मिल जायगा। स्थान-स्थान पर साधकगण ‘श्रीहनुमानचालीसा’ का…

श्री हनुमानजी, ‘एसो को उदार जग माहीं’।

पट्टमहिषी सत्याभामा चित्रशाला में दर्शिका से प्रत्येक चित्र का परिचय मनोयोग से सुनती जाती थीं। सहसा वे एक चित्र के सामने रूकीं। चित्रको देखकर विस्मय-विमुग्ध वे हठात् बोलीं- ‘प्रभु के…

श्री हनुमानजी महाराज प्रत्यक्ष देवता हैं। भाईजी श्रीहनुमानप्रसाद पोद्दार जी से सम्बन्धित सत्य-घटना प्रसंग।

पढ़ो, समझो और करो- दृढ़ विश्वासपूर्वक अपने अन्दर के सच्चे भाव से श्री हनुमानजी का स्मरण करने से चमत्कारिक ढंग से कार्य सिद्ध होते हैं। श्री मारूतिनन्दन प्रसन्न हो जाते…

श्रीरामजी छोटे बालक हैं, शिवजी व हनुमानजी ने क्या-क्या उपाय किये उनके पास पहुँचने के लिये। अदभुद प्रसंग।

कर्पूरगौर शिव और नील-कलेवर श्रीराम में अनन्य प्रीति है। सच तो यह है, भगवान् श्रीराम और महेश्वर तत्वतः एक ही हैं; इनमें भेद नहीं। इसी कारण ‘जो गोविन्द को नमस्कार…

श्रीहनुमान जी को मातृ-शिक्षा व सूर्यदेव से शिक्षा प्राप्ति ।

मातृ-शिक्षा से ही-बालक पर सर्वाधिक प्रभाब पड़ता है- बालक पर सर्वाधिक प्रभाब पड़ता है-माता के जीवन एवं उसकी शिक्षा का। आदर्श माताएँ अपने पुत्र को श्रेष्ठ एवं आदर्श बना देती…

श्री हनुमानजी के चरित्र व अवतरण के बारे में विस्तार से जानते हैं ?

इस धर्म-प्राण आर्य-धरा पर शायद ही कोई जनपद, कोई नगर और कोई गाॅंव ऐसा होगा, जहाॅं पवनकुमार का छोटा-बड़ा मन्दिर या मूर्ति न हो। अखाड़ों पर, जहाँ मूर्ति नहीं है,…