hanuman ji ka avataran

माता सीता के ठिकाने का पता लगाने जाते समय हनुमानजी ने प्रभु को हृदय में बिठाकर श्रीराम नाम जप करते हुए लंका के लिये प्रस्थान किया था।

मृगचर्म और जटा-मुकुट से सुशोभित सजल-जलद-वपु भगवान् श्रीराम गुफा के द्वार पर एक शिला खण्ड पर बैठे उदास मन से पक्षियों को देख रहे थे। दूर से शन्तमूर्ति श्रीरघुनाथजी का…

‘रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि’

अध्यात्म से यदि कोई व्यक्ति थोड़ा सा भी जुड़ा है तो उसने उपरोक्त श्लोक की पंक्ति को जरूर पढ़ा या सुना होगा। श्रीरामचरित मानस का यह श्लोक अद्वितीय है। सम्पूर्ण…

मंगल-मूरति मारूत-नन्दन

श्रीहनुमानजी के प्रति शंकाओं का स्पष्ट समाधान प्रमाणिक उदाहरण सहित । श्रीहनुमानजी के प्रति इस धरा में कई प्रकार की भ्रामक शंकायें अन्जान लोंगों द्वारा उत्पन्न कर दी गयीं। इन…

श्रीहनुमानजी सुग्रीव-के सचिव थे, बाली से कैसे बचाया? गुरूदक्षिणा में दिये बचन को कैसे निभाया।

ऋक्षरजा के दो पुत्र थे-बाली और सुग्रीव। पिता अपने दोनों पुत्रों को समान रूप से प्यार करते थें। दोनों बालक अत्यन्त धीर, बीर, बलवान्, बृद्धिमान् एवं सुन्दर तो थे ही,…

मूर्ति-कला में श्री हनुमान का संकटमोचक रूप

श्रीराम के अनन्य भक्त के रूप में श्रीहनुमानजी का नाम प्रख्यात है। अत्याचार के प्रतिनिधि रावण तथा उसके सयोगियों के दमन में श्री हनुमानजी ने निस्संदेह अतुलित बल का परिचय…

विश्वास के स्वरूप श्रीहनुमानजी

हमारे भारत के छोटे-से छोटे और बड़े-से-बड़े, किसी भी नगर में आप जायेंगे तो वहाँ आपको कहीं-न-कहीं श्रीहनुमानजी का मन्दिर अवश्य देखने को मिल जायगा। स्थान-स्थान पर साधकगण ‘श्रीहनुमानचालीसा’ का…

श्री हनुमानजी, ‘एसो को उदार जग माहीं’।

पट्टमहिषी सत्याभामा चित्रशाला में दर्शिका से प्रत्येक चित्र का परिचय मनोयोग से सुनती जाती थीं। सहसा वे एक चित्र के सामने रूकीं। चित्रको देखकर विस्मय-विमुग्ध वे हठात् बोलीं- ‘प्रभु के…

श्री हनुमानजी के चरित्र व अवतरण के बारे में विस्तार से जानते हैं ?

इस धर्म-प्राण आर्य-धरा पर शायद ही कोई जनपद, कोई नगर और कोई गाॅंव ऐसा होगा, जहाॅं पवनकुमार का छोटा-बड़ा मन्दिर या मूर्ति न हो। अखाड़ों पर, जहाँ मूर्ति नहीं है,…