Sprituality

  • सदगुरूदेव श्रीनृत्यगोपालदास का कर्णवेध-संस्कार।

    सदगुरूदेव श्रीनृत्यगोपालदास का कर्णवेध-संस्कार।

    श्री महाराज जी की आयु जब तीन वर्ष की हो गयी थी तब उनका कणवेध संस्कार सम्पन्न हुआ था। श्रीगणेशाम्बिका आदि के पूजन के पश्चात् बालक नृत्यगोपाल को वस्त्राभूषणों से सुशोभित कर उन्हें कम्बल पर पूर्वाभिमुख बैठा दिया गया। तदनन्तर पुत्र के हाथ में भोजनार्थ कुछ मिष्ठान देकर ‘ऊँ भद्रं कर्णेभिः।’ इस मन्त्र का उच्चारण…


  • ‘‘श्रीरामनाम’’ महिमा। ‘श्रीरामनाम से महापूरण।’

    ‘‘श्रीरामनाम’’ महिमा। ‘श्रीरामनाम से महापूरण।’

    भगवान् श्रीराम जी लंका विजय करके श्री अवध धाम में पधार चुके हैं। उनका राज्याभिषेक हो चुका है। प्रतिदिन प्रातःकाल हनुमान् जी युगल सरकार के श्रीचरणों में साष्टांग दण्डवत् प्रणाम किया करते थे। ज्यों ही प्रभु की कृपामयी दृष्टि हनुमान् जी पर पड़ती थी, त्योंही उन्हें हनुमान जी द्वारा किये हुए उपकारों की याद आ…


  • ‘योग’ शब्द का मौलिक अर्थ क्या है? यह एक विचारणीय प्रश्न है।

    ‘योग’ शब्द का मौलिक अर्थ क्या है? यह एक विचारणीय प्रश्न है।

    ‘योग’ शब्द का अर्थ वास्तव में निषेधपरक न होकर विधिपरक है। इसमें कोई संदेह नहीं है। परन्तु योगसूत्र में ‘योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः’ इस प्रकार योग का जो प्रारम्भिक वर्णन किया है, वह निषेधपरक ही है। इसका कारण प्रार्थमिक अभ्यासी की, योग के तात्विक स्वरूप को, जो ‘स्वयं तदन्तःकरणेन गृह्यते’ के अनुसार स्वयंसंवेद्य ही है, समझने की क्षमता…