अध्यात्म से यदि कोई व्यक्ति थोड़ा सा भी जुड़ा है तो उसने उपरोक्त श्लोक की पंक्ति को जरूर पढ़ा या सुना होगा। श्रीरामचरित मानस का यह श्लोक अद्वितीय है। सम्पूर्ण श्रीरामचरित मानस अत्यन्त सारगर्भित ग्रन्थ है। मानस का प्रत्येक श्लोक, चैपाई, दोहा व सोरठा अपने आप में अलग है। कोई भी मनुष्य श्रीरामचरित मानस की मात्र एक चैपाई का ही अनुसरण कर लेता है तो उसका जीवन धन्य हो जाता है।

श्रीसीताराम नाम संकीर्तन की महिमा अपरम्पार है। भव सागर से पार जाने के लिये नौका के समान है। हमारे परम् पूज्य गुरूजन, साधु-सन्त-महात्मा एवं सम्मानित कथाबाचक इस अद्भुद ग्रन्थ श्रीरामचरित मानस को पड़ने और इसके चरित्र को अपने जीवन में उतारने के लिये हमेशा प्रेरित करते रहतें हैं।

एतएव आप हम सभी को नित्य श्रीरामचरित मानस का अध्यन करना चाहिये एवं इसके भावार्थ को बहुत अच्छे से समझकर अपने जीवन में अवश्य उतारना चाहिये। मेरे अध्यात्मिक गुरू प्रातः स्मरणीय संतसिरोमणि महन्त नृत्यगोपालदास जी महाराज श्रीरामचरित मानस को पढ़ने लिये सभी को प्रेरित किया करते हैं। श्री महाराज जी अपना आर्शीवचन इस श्लोक को बोलने से ही प्रारम्भ करते हैं।

ऊँ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्ण मेवावशिष्यते।।

इस श्लोक को बोलने के बाद श्री महाराज जी मंगलकामना हेतु श्री सीताराम नाम संकीर्तन धुन का मंगलगान जरूर करते हैं।

।। सीताराम सीताराम सीताराम, सीताराम सीताराम सीताराम।।

श्रीसीताराम नाम संकीर्तन इतना पावरफुल है कि व्यक्ति का सदैव मंगल करता है। नाम संकीर्तन से बड़े से बड़ा कार्य एकदम सरलता से सम्पन्न हो जाता है। ऊपर मैंने 06 वार सीताराम नाम लिखा है। इसका बहुत महत्वपूर्ण अर्थ है। श्री महाराज जी ने मुझे एक बार समझाया था कि प्रत्येक व्यक्ति को 06-06 के स्टेप में श्रीसीताराम नाम संकीर्तन करना चाहिये क्यों कि यदि व्यक्ति इसके 18 स्टेप पूरे कर लेता है तो उसका एक माला यानि 108 नाम पूरे हो जाते हैं।

सीतारामपदाम्बुजे मधुपवद् यन्मानसं लीयते सीतारामगुणावली निशि दिवा यज्जिव्हया पीयते।।

सीतारामविचित्ररूपमनिशं यच्चक्षषोर्भूषणं सीतारामसुनामधमनिरंत तं मारूतिं सम्भजे।।

श्री हनुमानजी महाराज निरंतर राम नाम संकीर्तन करते रहते हैं इसीलिये उनके पास समस्त निधियां, अतुलित बल, श्रेष्ठ गुण, बुद्धि व नीतियाँ विद्यमान हैं। प्रत्येक व्यक्ति को श्रीहनुमान जी महाराज की भक्ती अवश्य करनी चाहिये। हनुमानजी हम लोगों को श्रीसीतारामजी से साक्षात्कार अवश्य करा देंगे। यही अटूट विश्वास होना चाहिये।

श्रीरामचरित मानस का निम्नलिखित श्लोक हम सभी को नित्य सच्चे मन से अवश्य बोलन/पढ़ना चाहिये। इससे हम सभी के अंदर श्री हनुमानजी महाराज की भक्ति दिनों-दिन बढ़ती चली जायेगी।

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवहनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।

सकल गुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि।।

जो अतुल बलके धाम, सोने के पर्वत (सुमेरू)-के समान कान्तियुक्त शरीरवाले, दैत्यरूपी वन (को ध्वंस करने)-के अग्निरूप, ज्ञानियों में अग्रगण्य, सम्पूर्ण गुणों के निधान, वानरों के स्वामी और श्रीरघुनाथजी के प्रिय भक्त हैं, उन पवनपुत्र श्री हनुमानजी को मैं प्रणाम करता हॅँू।

सारांस नियमित श्रीसीताराम राम नाम संकीर्तन के साथ श्री हनुमानजी की भक्ति अवश्य कीजिये। जीवन बदल जायेगा।

समस्त पाठकबन्धुओं को मेरा सादर जय सियाराम जय हनुमान।

लेखक-अनिल यादव।

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