Shri HanumanPrasad ji PoddarShri HanumanPrasad ji Poddar
पढ़ो, समझो और करो-
दृढ़ विश्वासपूर्वक अपने अन्दर के सच्चे भाव से श्री हनुमानजी का स्मरण करने से चमत्कारिक ढंग से कार्य सिद्ध होते हैं। श्री मारूतिनन्दन प्रसन्न हो जाते हैं।
मारूति-प्रसन्न-
आप लोगों ने भाईजी श्री हनुमानप्रसादजी पोद्दार (Shri HanumanPrasad ji Poddar) का नाम जरूर सुना होगा उन्हीं से सम्बन्धित यह प्रसंग अन्त्यत महत्वपूर्ण है। श्री भाईजी का नाम ही अपने आप में काफी है। श्री भाईजी स्वनाम अध्ययन करने में काफी चर्चित रहे। उनके द्वारा एक से बढ़कर एक लेख लिखे गये। उनकी आत्मीयता, सौहार्द एवं प्रीति चिरस्मरणीय है।
बात उस समय की है जब श्री भाई जी रतनगढ़, राजस्थान में रहते थे, उनकी माता जी थीं। श्रीविमाता वात्सल्य के साथ-साथ खान-पान, रहन-सहन का विशेष ध्यान रखा करती थीं। भाई जी की माताजी श्रीहनुमान जी की अन्यय भक्त हुआ करती थी।
माताजी एक प्रसंग सुना रहीं थीं जिसे भाईजी के साथी मित्र ने सुना था-
श्री भाईजी के साथी मित्र के द्वारा बताया गया कि, ‘श्री भाईजी की माता-पिता की कोख से उस समय तक कोई पुत्र नहीं हुआ था। एक महात्मा ने श्रीहनुमानजी की उपासना बतलायी थी। माताजी को स्वप्न में हनुमानजी ने दर्शन देकर एक फल दिया था। उसी आशीर्वाद-प्रसाद के वाद भाईजी का जन्म हुआ था।’’
इसके प्रमाणस्वरूप उनके बाताया गया कि ‘ भाईजी का एक हाथ कुछ छोटा है और केहुनी के मोड़ से पीछे की ओर वह अत्यधिक मुड़ जाता है।’ निश्चय ही भाईजी की प्रतिभा, संकल्प और प्यार में किसी देवता के प्रसाद की झलक मिलती थी। भाईजी, श्रीहनुमानजी के अनन्य भक्त थे, यह घटना सन् 1940 के पूर्व की है।
सारांस- श्री हनुमानजी महाराज बहुत ही जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। सच्चे मन से कोई भी करके देख लेवे, अभीष्ट फल की प्राप्ति अवश्य होगी।
समस्त पाठकबन्धु को मेरा -जय सियाराम जय हनुमान।
लेखक- अनिल यादव।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *