श्रीबिहारीजी का ऐसा भक्त जिसकी गवाही स्वंय बिहारीजी ने कोर्ट में जाकर दी।

श्री वृन्दावन के पास एक ब्राह्मण रहता था। एक समय ऐसा आया कि उसके सभी घरबालों की मृत्यु हो गयी। केवल वही अकेला बच रहा। उसने उन सबका श्राद्ध आदि…

विश्वास के स्वरूप श्रीहनुमानजी

हमारे भारत के छोटे-से छोटे और बड़े-से-बड़े, किसी भी नगर में आप जायेंगे तो वहाँ आपको कहीं-न-कहीं श्रीहनुमानजी का मन्दिर अवश्य देखने को मिल जायगा। स्थान-स्थान पर साधकगण ‘श्रीहनुमानचालीसा’ का…

श्री हनुमानजी, ‘एसो को उदार जग माहीं’।

पट्टमहिषी सत्याभामा चित्रशाला में दर्शिका से प्रत्येक चित्र का परिचय मनोयोग से सुनती जाती थीं। सहसा वे एक चित्र के सामने रूकीं। चित्रको देखकर विस्मय-विमुग्ध वे हठात् बोलीं- ‘प्रभु के…

श्रीहनुमानजी, अलीगंज, (hanuman ji aliganj) लखनऊ उ0प्र0! और यहाँ का प्रसिद्ध मेला। हिन्दू, मुसलमान और ईसाइ क्यों आते हैं इस मंदिर में?

अलीगंज का श्रीहनुमान-मेला विख्यात है। पहले इस स्थान को लक्ष्मणपुर कहा जाता था। लक्ष्मणपुर कहलाने वाली इस नगरी से होकर प्रवाहित होती हुई गोमती के उस पार 19 वीं सदी…

श्री हनुमानजी महाराज प्रत्यक्ष देवता हैं। भाईजी श्रीहनुमानप्रसाद पोद्दार जी से सम्बन्धित सत्य-घटना प्रसंग।

पढ़ो, समझो और करो- दृढ़ विश्वासपूर्वक अपने अन्दर के सच्चे भाव से श्री हनुमानजी का स्मरण करने से चमत्कारिक ढंग से कार्य सिद्ध होते हैं। श्री मारूतिनन्दन प्रसन्न हो जाते…

क्या आपने पूना, महाराष्ट्र के ‘‘डुल्या मारूति’’ और ‘‘सोन्या मारूति’’ के दर्शन किये हैं?

यदि आप हनुमानजी के भक्त हैं और श्री हनुमानजी के मंदिर के बारे में जानना चाहते हैं तो मैं आपको आज पूना, महाराष्ट्र(maharashtra) के दो प्रसिद्ध हनुमान मंदिर के बारे…

श्रीरामजी छोटे बालक हैं, शिवजी व हनुमानजी ने क्या-क्या उपाय किये उनके पास पहुँचने के लिये। अदभुद प्रसंग।

कर्पूरगौर शिव और नील-कलेवर श्रीराम में अनन्य प्रीति है। सच तो यह है, भगवान् श्रीराम और महेश्वर तत्वतः एक ही हैं; इनमें भेद नहीं। इसी कारण ‘जो गोविन्द को नमस्कार…

श्रीहनुमान जी को मातृ-शिक्षा व सूर्यदेव से शिक्षा प्राप्ति ।

मातृ-शिक्षा से ही-बालक पर सर्वाधिक प्रभाब पड़ता है- बालक पर सर्वाधिक प्रभाब पड़ता है-माता के जीवन एवं उसकी शिक्षा का। आदर्श माताएँ अपने पुत्र को श्रेष्ठ एवं आदर्श बना देती…

श्री हनुमानजी का बाल्यकाल। देवताओं का आर्शीवाद। हनु (ठुड्डी) का रहस्य एवं चंचलता से सौम्यता की अदभुद कथा।

माता अन्जना अपने प्राणप्रिय पुत्र हनुमानजी का लालन-पालन बड़े ही मनोयोगपूर्वक करतीं। कपिराज केसरी भी उन्हें अतिशय प्यार करते। जब हनुमानजी प्रसन्नतापूर्वक निकलते तो अन्जना और केसरी आनन्द-मग्न हो जाते।…

श्री हनुमानजी के चरित्र व अवतरण के बारे में विस्तार से जानते हैं ?

इस धर्म-प्राण आर्य-धरा पर शायद ही कोई जनपद, कोई नगर और कोई गाॅंव ऐसा होगा, जहाॅं पवनकुमार का छोटा-बड़ा मन्दिर या मूर्ति न हो। अखाड़ों पर, जहाँ मूर्ति नहीं है,…