श्रीमणिराम छावनी, वासुदेव घाट, अयोध्या उ0प्र0, मेरा गुरूद्वारा है। 1008 श्री नृत्य गोपाल दास जी महाराज, श्रीमणिरामदास छावनी के श्रीमहान्त के साथ श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र एवं श्रीकृष्ण जन्म भूमि के अध्यक्ष भी हैं। चरित्रनायक प्रातः स्मरणीय श्रीगुरूदेव महाराज की मेरे ऊपर विशेष कृपा है।

मेरे आराध्य भगवान श्रीरामजी की जन्म भूमि श्री अयोध्या धाम है। मानवता की उद्गम स्थली श्री अयोध्या पुरी की उत्तर दिशा में कल-कल निनादिनी नेत्रजा, रामगंगा पतित पावनी श्रीसरयू जी बहती हैं। मोक्षदायनी इस पुरी के वासुदेवघाट में ‘श्रीमणिरामदास छावनी’ सुप्रसिद्ध जगत् विख्यात एक परमार्थ संस्था है। इसके आदि संस्थापक स्वामी श्रीमणिरामदास जी महाराज हैं। उनकी तपस्या और त्याग ही ‘छावनी’ है।

इसका मर्यादित पवित्र इतिहास लगभग 250 पुराना है। यहाँ का परम्परागत मूलधर्म ‘साधु-सेवा’ है। इस संस्था को अब ‘श्रीमणिरामदास छावनी सेवा ट्रस्ट’ के नाम से जाना जाता है। यहाँ पर सन्त-महात्माओं, गौ-ब्राह्मणों एवं दीन-दुःखियों की सेवा निरन्तर होती है, जो क्रमशः दिन दूनी रात चैगनी बढ़ती ही जा रही है।

प्रायः सरकारी सैनिकों के रहने की जगह को ‘छावनी’ कहा जाता है; परन्तु ‘श्रीमणिरामदास की छावनी’ का तात्पर्य ऐसा नहीं है। यहाँ तो सन्त-महात्मा सदैव विराजमान रहते हैं। बाबा श्रीमणिरामदास जी महाराज चित्रकूट से तपस्या पूरी करके पुनः जब श्रीअयोध्या जी पधारे तो सबसे पहले श्रीसरयू जी के पावन तट पर एक कुटिया में घास-फूस की छपपर छा कर रहते थे; इसलिये छोग इसको ‘छावनी’ कहने लगे। बाबा जी इस छावनी में यथाशक्ति साधु-सेवा करते थे।

छावनी शब्द का एक दूसरा अर्थ यह भी है कि बड़े सरकार भगवान् श्रीरामजी हैं। साधु-सन्त-महात्मा ये सब श्रीराम दल के सैनिक हैं। इनकी संख्या अन्य तीर्थ-स्थलों की अपेक्षा श्री अयोध्या जी में अधिक है। अतएव इन सैनिकों की सेवा और सुरक्षा होती रहे, इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए यहाँ पर कई छावनियाँ बनायी गयीं। उनमें से श्रीमणिरामदास छावनी प्रमुख है।

यदि आप वास्तव में साधू-संन्त-सेवा, गौ-सेवा करना चाहते हैं तो इस स्थान से अच्छा स्थान आपको कहीं नहीं मिलेगा। इस स्थान पर लगभग 250 वर्षो से अनवरत साधू-सेवा, गौसेवा चल रही है। यहाँ प्रतिदिन हजारों साधु-सन्तों के लिये भण्डारा दिया जाता है। श्री महाराज जी साधु-संतों को पवाये (खिलाये) बिना नहीं पाते हैं। आपको इस स्थान में एक साथ हजारों साधू-संतों के दर्शन प्राप्त हो जायेंगे। यहाँ के श्रीहनुमानजी महाराज की विशेष कृपा है इस स्थान पर एवं यहाँ के भक्तों पर। सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं। अयोध्या का विशेष सिद्ध स्थान है। 26 वर्षो से लगातार मुझे यहाँ सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ।

सारांस यही है कि साधु-ते होई न कारज हानि, गुरू बिन ज्ञान कहां से आये, सेवा बिन मेवा कैसे पाये। इस स्थान पर आपको सब मिल जायेगा।

श्रीसीताराम जी महाराज की जय श्री हनुमानजी महाराज की जय, श्री गुरूदेव भगवान की जय।
लेखक- अनिल यादव।

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