Nritya Gopal das ji Maharaj

श्रीमणिराम दास छावनी, वासुदेवघाट अयोध्या एक महत्वपूर्ण स्थान है। इस स्थान पर महत्पूर्ण दर्शनीय स्थल है-

1-श्रीजानकीरमण मन्दिर- श्रीजानकीरमण मन्दिर श्रीमणिरामदास छावनी का प्रधान मन्दिर है। यहाँ पर परमपावन परात्पर ब्रह्म सच्चिदानन्द स्वरूप श्री जानकीरमण भगवान श्रीराम जी एवं भगवती श्रीजानकी जी साक्षात्् विराजमान है इनके साथ ही श्री लक्ष्मण जी, श्री राधेश्याम जी श्री शालग्राम भगवान् आदि के दिव्य-भव्य श्री विग्रहो का साक्षात दर्शन होता है।

श्रीहनुमान जी महाराज- श्रीजानकीरमण भगवान की बायीं ओर मंगलमूर्ति सर्वसिद्ध श्री हनुमान् जी महाराज विराजमान हैं।

मंगल मूरति मारूत नंदन। सकल अमंगल मूल निकंदन।।

पवनतनय संतन हितकारी। हृदय बिराजत अवधविहारी।।

2-श्रीरंगनाथ मन्दिर- श्रीजानकीरमण मंन्दिर की बायीं ओर श्री रंगनाथ जी का भव्य मन्दिर है। यहाँ पर रघुवंशियों के कुलदेवता शेषशीय श्री रंगनाथ भगवान् जी का दर्शन होता है। इस मन्दिर में भगवती श्री लक्ष्मी माता जी, श्री विष्णु भगवान् जी, श्री नरसिंह भगवान् जी श्री गणेश जी और श्री गरूणदेव जी इत्यादि अनेक पार्षदगण विराजमान हैं।

3-श्रीचारधाम मन्दिर- संगमर्मर निर्मित यह भव्य मन्दिर है। ‘घर में ही चारों धाम रहिबै।’ इस मन्दिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ पर एक साथ ही चार धामों के सर्व श्री विग्रहों अथवा श्री भगवानों का एकत्र दिव्य दर्शन लाभ होता है जो क्रमशः
(1) श्रीबद्रीनाथ धाम- श्री बद्रीनारायण भगवान् एवं उनके पंचायतन का दिव्य दर्शन सुलभ हो जाता है।
(2) श्रीजगन्नाथ धाम- यहाँ पर भगवान् श्रीकृष्ण, सुभद्रा जी एवं बलराम जी के आलौकिक दिव्य विग्रह विराजमान हैं। श्रीभगवान् के नाम, रूप, लीला और धाम ये चारों ही परम् सत्य है।
ममदरसन फल परम अनूपा। जीवन पाव निज सहज सरूपा।।
(3) श्रीद्वारका धाम- श्री द्वाराकाधीश भगवान् विराजमान है। श्री भगवान् ने कहा है-
‘जन्म कर्म च मे दिव्यम्।’
अर्थात् मेरे जन्म और कर्म दिव्य और अलौकिक है।
(4) श्रीरामेश्वर धाम-यहाँ पर रामेश्वरम् ज्योतिर्लिंग महादेव साक्षात् विराजमान हैं।
‘जे रामेस्वर दरसु करिहहिं।
जो गंगाजलु आनि चढ़ाइहि। सो साजुज्य मुक्ति नर पाइहि।।
यह औढ़र-दानी, आशुतोष, भूतभावन भोले बाबा भगवान् श्री शिवशंकर जी महाराज के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख है।

4-श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण भवन- इस भवन के चबूतरे में महर्षि वाल्मीकि और लव-कुश जी विराजमान हैं। यह दिव्य-भव्य भवन सिफ श्री अयोध्यापुरी का ही नहीं; अपितु सम्पूर्ण विश्व का एक अ़िद्वतीय, अनोखा, अनुपम, आकर्षक, संगमर्मर का चमकता हुआ उज्जल गगन-चुम्बी ऐतिहासिक भवन है। इसमें श्रीवाल्मीकि रामायण के चैबीस हजार श्लोक संगमर्मर के शिलाखण्डों से निर्मित भित्तियों पर अंकित किये गये हैं।

5-अन्तर्राष्ट्रीय श्री सीताराम नाम बैंक- इसका केन्द्रीय (प्रधान) कार्यालय श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण भवन के तीसरी मंजिल पर है। यहाँ पर अरबों-खरबों की संख्या में श्रीभगवन्नाम का दर्शन होता है। साथ ही, विभिन्न भाषाओं की लेखनजप कृतियाँ, श्रीराम नामाकिंत चित्रावलियाँ, श्रीसीताराम नामाकिंत चावल के दाने, श्री रामनामाकित सरसों के दाने, चित्रपटांकित गेहूँ के दाने, चने के छिलके के अन्दर एक जोड़ी जनेऊ, पं0 लौकीराम शास्त्री कद पाँच फीट दस इंच और स्वर्णपदक, रजत पदक, ताम्रपदक ये सब बैंक की दुर्लभ दर्शनीय वस्तुएँ हैं जो यहाँ संगृहीत एवं सुरक्षित हैं।

6-पुस्तकालय- यहाँ पर चारों वेद तथा धार्मिक सद्ग्रन्थों एवं पाण्डुलिपियों के संग्रह का बहुमूल्य दर्शन होता है।

7-सन्त-निवास- सन्त निवास की स्थिति ठीक चारधाम के सामने है। यहाँ पर विभिन्न सम्प्रदाय के हजारों दर्शनीय साधु-सन्त निवास करते हैं। जैसे-वैरागी, सन्यासी, उदासी, कबीर पन्थी, योगी, त्यागी और तपस्वी इत्यादि।

8-कोठार एवं अन्न क्षेत्र (लंगर)- कोठार में सदैव विशाल अन्न का भण्डार भरा रहता है। अन्नक्षेत्र व विशाल पाकशाला है हजारों लोगों की रसोई नित्यप्रतिदिन बनती है।

9-गीता स्तम्भ- इसमें ताम्रपत्र के ऊपर सम्पूर्ण श्रीमद्भगवद्गीता के सात सौ श्लोक लिपिबद्ध हैं।

10-विन्दु सरोबर- इस सरोवर में भाद्रशुल्क पक्ष एकादशी को श्री ठाकुर जी का जलबिहार महोत्सव मनाया जाता है।

11-बड़ी बगिया- यह श्री ठाकुर जी की फुलवाड़ी है, इसलिए यहाँ पर सदैव तुलसी इत्यादि शोभायमान रहते हैं। यहीं से श्री ठाकुर जी के लिए फूल और तुलसी की निरन्तर सेवा होती रहती है।

इस प्रकार श्रीमणिरामदास छावनी के विशाल परिसर में भक्ति के सर्वांगीण माध्यम तथा स्रोत विद्यमान हैं जो –
‘जिनकी रही भावना जैसी। प्रभु मूरति देखी तिन्ह तैसी।।’

के अनसार हर भावुक दर्शनार्थी भक्त की भावनाओं की आपूर्ति कर, उसके आध्यात्मिक जीवन को रसमयता प्रदान कर, इस पावन तपस्थली की सार्थकता सिद्ध करते हैं तथा इस पुनीत पीठको पूर्णता प्रदान करते हैं।

सारांस यदि अयोध्या के दर्शन किये और श्रीमणिरामदास छावनी के उपरोक्त दर्शन नहीं किये तोे यात्रा पूर्ण नहीं होगी।

जय सियाराम जय हनुमान जय गुरूदेव।

लेखक-अनिल यादव।

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