सदगुरूदेव श्रीनृत्यगोपालदास का कर्णवेध-संस्कार।

श्री महाराज जी की आयु जब तीन वर्ष की हो गयी थी तब उनका कणवेध संस्कार सम्पन्न हुआ था। श्रीगणेशाम्बिका आदि के पूजन के पश्चात् बालक नृत्यगोपाल को वस्त्राभूषणों से…

‘‘श्रीरामनाम’’ महिमा। ‘श्रीरामनाम से महापूरण।’

भगवान् श्रीराम जी लंका विजय करके श्री अवध धाम में पधार चुके हैं। उनका राज्याभिषेक हो चुका है। प्रतिदिन प्रातःकाल हनुमान् जी युगल सरकार के श्रीचरणों में साष्टांग दण्डवत् प्रणाम…

श्रीहनुमानजी का समुद्रोल्लंघन और लंका में प्रवेश।

श्रीहनुमान जी महाराज एवं वानर भालुओं को गृध्रराज सम्पाति के द्वारा श्री जनकदुलारी जानकी माता का पता लग जाने पर वानर-भालुओं का विशाल समुदाय हर्षातिरेक से उछलने-कूदने लगा; किंतु जब…

भूतभावन शिवशंकरजी की ‘‘रामनाम’’ उपासना।

बाबा विश्वनाथ शिवशंकर भोले नाथ के मुँह पर सदा ‘राम-नाम’ विराजित रहता है। स्वयं माता पार्वतीजी कहती हैं- ‘आध्यात्मरामायण’ आदि में वे स्वयं भी कहते हैं- अहं भवन्नाम गृणन् कृतार्थो…

‘‘श्रीरामनाम’’ महिमा। ‘श्रीरामनाम से महापूरण।’

भगवान् श्रीराम जी लंका विजय करके श्री अवध धाम में पधार चुके हैं। उनका राज्याभिषेक हो चुका है। प्रतिदिन प्रातःकाल हनुमान् जी युगल सरकार के श्रीचरणों में साष्टांग दण्डवत् प्रणाम…

स्वामी श्रीरामचरणदास जी महाराज, त्रृतीय पीठाधीश्वर, श्रीमणिरामदासजी छावनी, अयोध्या।

आप अपने गुरूदेव श्री वैष्णवदास जी महाराज के शिष्यों में सुयोग्यतम शिष्य थे। आपने बहुत पहले से ही महाराजश्री का शिष्यत्व ग्रहण कर लिया था। अपने गुरूदेव जी के महन्तत्व…

स्वामी श्री वैष्णवदास जी महाराज, द्वितीय पीठाधीश्वर, श्रीमणिरामदासजी छावनी, अयोध्या।

वैराग्य तथा साधुत्व से मण्डित आपका इतिहास अत्यन्त पवित्र रहा है। बाल्यकाल में जब आपको श्रीसीतारामजी की अहैतु कृपा से बैराग्य हुआ तो आप पारिवारिक माया-जाल, ममता, मोह आदि का…

अधिक मास की परमा एकदशी-

अधिमास की कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम परमा एकादशी है। इस दिन भगवान पुरुषोत्तम की धूप, दीप, नैवेद्य पुष्प आदि से पूजा करे। इससे अक्षय फल की प्राप्ति होती…