amarnath shivling
    मेरे द्वारा वर्ष 2017, 2018 व 2019 में श्री अमरनाथजी की यात्रा की गई। 2019 मेरे साथ मेरा पुत्र अतुल भी गया था। यात्रा के समय बेटा मात्र 14 वर्ष का था।
   तीनबार अमरनाथ यात्रा करने के बाद, जो अनुभव मिला उसके आधार पर मैने पूरी अमरनाथ यात्रा के पांच महत्वपूर्ण बिन्दु बनाये हैं। जो निम्नवत् हैं-
    मित्रों श्री अमरनाथ यात्रा के यह पांच बिन्दु आपकी यात्रा को सुखद, सरल, सहज एवं मंगलमयी अवश्य बना देगें। यह मेरी गारंटी है। अन्त तक जरूर पढ़ना।
1-श्री अमरनाथ यात्रा की दिमाग में योजना कैसे बनायें- 
2-चिकित्सा टेस्ट व श्री अमरनाथ यात्रा पंजीकरण कैसे करायें-
3-श्री अमरनाथ यात्रा पर जाने की जरूरी तैयारी कैसे करें-
4-श्री अमरनाथ यात्रा किस साधन से करना चाहिये-
5-श्री अमरनाथ यात्रा के समय कहाँ ठहरें और क्या खायें-
उपरोक्त बिन्दुओं के मनन करने के बाद ही यात्री अमरनाथ यात्रा के लिये तैयार हो पायेगा।
1-श्री अमरनाथ यात्रा की दिमाग में योजना कैसे बनायें- 
     देखिये यदि किसी भी व्यक्ति को श्री अमरनाथजी की यात्रा करनी है तो यात्रा तिथि जो कि प्रत्येक वर्ष जून माह के अन्तिम सप्ताह या जुलाई माह के प्रथम सप्ताह में प्रारम्भ होती है, उससे लगभग 6 महीने पहले अपने दिमाग में पूरी योजना बनानी होगी। यदि आप यात्रा के 6 महीने पहले से योजना का क्रियान्वयान अपने दिमाग में नहीं करते हैं तो आपको सायद उस वर्ष यात्रा ही करने को नहीं मिलेगी। इसलिये आपको यात्रा के वर्ष में यात्रा प्रारम्भ होने के 6 महीने पहले अपने दिमाक में यात्रा का पूरा खाका तैयार करना पड़ेगा। इसकी योजना बनाते समय आपको यह प्लान करना पड़ेगा कि आपका मेडीकल टेस्ट, अमरनाथ यात्रा पंजीकरण, यात्रा हेतु ट्रेन का रिजर्वेशन या हवाई जहाज का टिकिट, जम्मू से बालटाल तथा श्रीनगर से बालटाल की रोड़ से यात्रा किस साधन से और कैसे करनी है। इसके अतिरिक्त आपको अपने साथ क्या-क्या जरूरी सामग्री लेकर जाना है, यात्रा ग्रुप में या अकेले करनी है। जम्मू, उधमपुर, श्रीनगर व बालटाल में कहां रूकना है। बालटाल से घोड़ा या पिठ्ठू की व्यवस्था, रास्ते की पूरी जानकारी, रास्ते में चाय नास्ता, भोजन और रात्रि के भोजन एवं ठहरने की  उचित व्यवस्था कहाँ और कैसे मिलेगी। किस प्रकार के कपडे ले जाना है। वहाँ का मौसम कैसा रहेगा, कितना पैसा खर्च होगा, कितना समय लगेगा, जम्मू और कश्मीर के लोग कैसे हैं। इन सभी की जानकारी आपको विस्तृत रूप से होनी चाहिये। तभी आपकी यात्रा सुगम और मंगलमयी होगी। तो अब आप यह समझ गये होंगे कि दिमागी योजना बनाना कितना आवश्यक है। अब चलते अगले बिन्दु पर।
2-चिकित्सा टेस्ट व श्री अमरनाथ यात्रा पंजीकरण कैसे करायें-
      हाँ, जी इस बिन्दु में सर्वप्रथम आपको यह जान लेना चाहिये कि यात्रा का पंजीकरण (रजिस्टेªशन), यात्रा प्रारम्भ होने के लगभग 2-3 माह पूर्व यानि प्रत्येक वर्ष फरवरी, मार्च या अप्रैल में प्रारम्भ हो जाता है। पंजीकरण की तिथि भी पंजीकरण के 1-2 महीने पहले निर्धारित हो जाती है। इसकी अधिकारिक जानकारी आपको श्राईन वोर्ड की इस वेबसाइट ( https://www.shriamarnathjishrine.com/)  से मिल जायेगी। इस वेवसाईट पर यात्रा की सम्पूर्ण जानकारी तथा यात्रा हेतु महत्वपूर्ण दिशा निर्देश मिलेंगे। जिसे आपको यात्रा के पहले से जानना आवश्यक है। और दिये गये दिशा निर्देशों का पालन करना आवश्यक है। जी हाँ अब आपको अमरनाथ यात्रा पंजीकरण के पहले अपना मेडीकल टेस्ट कराना आवश्यक है मेडीकल टेस्ट हेतु भारत के प्रत्येक जिले के सरकारी चिकित्सालय में डाक्टर्स की टीम निर्धारित हो जाती है जो यात्रा हेतु मेडीकल टेस्ट करती है। टेस्ट के बाद आपको चिकित्सा प्रमाण पत्र प्रदान करेगी। चिकित्सकों द्वारा आप यात्रा के लिये स्वस्थ्य/समर्थ पाये जाते हैं तभी आपको चिकित्सा विभाग द्वारा चिकित्सा प्रमाण पत्र प्रदत्त किया जायेगा। चिकित्सा प्रमाण पत्र के आधार पर ही आप अपना श्री अमरनाथ यात्रा हेतु पंजीकरण करा पायेंगे। अब बात आती है कि आप चिकित्सा प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद यात्रा का रजिस्ट्रेशन कहाँ से और कैसे करायेंगे तो हम आपको बता देते हैं कि भारत के प्रत्येक जिले में जम्मू एण्ड कश्मीर बैंक या श्राईन बोर्ड द्वारा जिले की कुछ सरकारी बैंकों को अमरनाथ यात्रा पंजीकरण किये जाने हेतु लिस्टेड किया जाता है जिसकी जानकारी आपको रजिस्ट्रेशन तिथि से पहले अवश्य करनी पडे़गी। और उसी बैंक में जाकर आप अपना रजिस्ट्रेशन करवा पायेंगे। यहाँ यह बताना भी आवश्यक है कि आपको जिस तिथि का रजिस्ट्रेशन करवाना है वह तिथि का रजिस्ट्रेशन सर्टीफिकेट बैंक में उपलब्ध है या नहीं यह भी समझना होगा। आपको जिस तिथि का रजिस्ट्रेशन प्राप्त होगा उस तिथि के एक पहले और एक दिन बाद तक ही आप बालटाल से श्रीअमरनाथ गुफा की यात्रा कर सकते हैं।
       यात्रा पंजीयन होने के उपरान्त ही यात्रा की तिथि निर्धारित होगी। मुझे लगता है कि आपको रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया भी पूर्ण रूप से समझ में आ गयी होगी। प्रथमबार यात्रा पर जाने वाले यात्री को मैं एक उचित सलाह देना चाहता हूँ। मेरा सुझाव यह है कि प्रत्येक वर्ष भारत से अमरनाथ यात्रा के लिये कुछ समूह/गु्रप जाते हैं। यात्री को इन समूहों/ग्रुप से सम्पर्क करके अपनी यात्रा का प्लान बनाना चाहिये। क्योंकि इन्हें यात्रा का सम्पूर्ण अनुभव रहता है। चलते हैं अगले बिन्दु पर।
3-श्री अमरनाथ यात्रा पर जाने की जरूरी तैयारी कैसे करें-
       हा,जी मित्रों उपरोक्त जानकारी से आप सहमत होंगे। अब यदि आपका मेडीकल और यात्रा का पंजीयन हो गया है तो आपको अपनी यात्रा तिथि के अनुरूप अपने घर से बालटाल तक पहुँचने हेतु ट्रेन या हवाई जहाज का टिकिट तुरन्त बुक कर लेना चाहिये जिससे कि आपकी सीट कन्फर्म हो जाये अन्यथा की स्थिति में आपको टिकिट/सीट नहीं मिलेगी। अब टिकिट कन्फर्म हो गया है तो अब आपको सड़क मार्ग से बालटाल तक पहुचने हेतु टेक्सी/बस को भी बुक कर लेना चाहिये। यदि टेक्सी/बस की व्यवस्थ भी हो गयी है तो अब आपको बालटाल में कहाँ रूकना है यह भी तय करना आवश्यक है क्यों कि बालटाल में यात्रा के समय ही अस्थाईरूप से कैंप भण्डारे और लंगर इत्यादि विभिन्न सेवा मण्डलों एवं जम्मू एण्ड कश्मीर सरकार द्वारा संचालित किये जाते हैं। इन्हीं भण्डारों एवं कैंपों में अधिकतर यात्रि पहुँचकर रूकते हैं। सभी भण्डारों में निशुल्क चाय, नास्ता, भोजन व रात्रि भोजन मिलता हैं। भण्डारे वाले यात्रियों को रूकने के लिये कम्बल विस्तर इत्यादि की व्यवस्था भी निशुल्क करते हैं। कुछ महत्वपूर्ण सेवा मण्डलों के नाम फोन नम्बर आपको आनलाईन या अपने क्षेत्र के यात्रा ग्रुप से मिल जायेगें। अब आपका यह कार्य भी पूर्ण हो गया तो समझ लीजिये कि आप बालटाल पहुँचकर ठहर गये हैं।
     अब आपको बाबा बरफानी के दर्शन के लिये जाने की व्यवस्था करनी है। जी हाँ, दोस्तो बालटाल से श्रीअमरनाथ गुफा तक पहुँचने के लिये आपको घोड़ा, पालकी या पिठ्ठू की व्यवस्थ करनी पड़ेगी यदि आप समर्थ हैं तो पैदल यात्रा भी कर सकते हैं। ज्यादातर यात्री घोड़े से ही बाबा अमरनाथ गुफा तक की यात्रा करते हैं। बालटाल से अमरनाथ गुफा की दूरी लगभग 14 कि0मी0 है। यात्रा तिथि से एक या दो दिन पहले आपको बालटाल पहुँच जाना चाहिये। क्योंकि यात्रा तिथि से एक दिन पहले या एक दिन बाद तक ही आप अमरनाथ गुफा तक जाने के लिये अनुमन्य हैं।
     बालटाल में रहने और खाने की व्यवस्थ हो जाने के बाद आपको अमरनाथ गुफा की यात्रा हेतु यात्रा के एक दिन पहले ही घोडे़ को बुक कर लेना चाहिये। घोड़ा 3000-5000 रू0, पालकी 20000-30000 रू0 और पिठ्ठू 10000-15000 रू0 में मिल जायेगा। घोडे़ से आने-जाने में लगभग 8-10 घंटे, पालकी व पिठ्ठू से 10-12 घंटे लगेंगे। और आप वापस बालटाल आ जायेंगे। पैदल यात्रा में आपकी शारीरिक क्षमता के अनुरूप समय लगेगा। मेरी सलाह यही है कि आप घोडे़ से ही यात्रा करें। जी मित्रों यहाँ यह बताना भी जरूरी है कि घोड़ा आपको गुफा से लगभग 800-900 मीटर पहले उतार देगा। उसके बाद आपको गुफा तक पहुचने में काफी परेशानी हो सकती है क्योंकि वहाँ आक्सीजन की कमी हो जाती है। जिससे थोड़ा सा भी चलना मुस्किल हो जाता है। इसलिये आपको घोडे़ से उतरने के वाद पालकी ले लेनी चाहिये जो आपको लगभग 1500-2500 में मिल जायेगी। और गुफा तक लेकर जायेगी दर्शन कराकर वापस घोड़े तक छोड़ देगी। आपको पूरे रास्ते में चाय नाश्ता भोजन इत्यादि मिलता रहेगा। जो निशुल्क होगा। पैदल यात्रियों को गुफा के पास रूकना पड़ जाता है थकान की बजय से। गुफा के पास अधिकतर वर्फ ही होती है। उसी वर्फ में ही तम्बू/ कैंप बनाये जाते हैं। इसलिये रूकने में थोड़ी तकलीफ हो सकती है आपको।
     दोस्तो जम्मू एण्ड कश्मीर में अन्य प्रदेशों की केवल पोस्टपेड सिम ही काम करतीं हैं। बीएसएनएल, एअरटेल, जियो की सेवायेें उपलब्ध रहेंगी। गुफा तक केवल बीएसएनएल पोस्टपेड सिम काम करेगी इसलिये आप चाहें तो अपने साथ पोस्टपेड सिम ले जा सकते हैं अपने प्रदेश की या फिर जम्मू एण्ड कश्मीर में पहुँचकर एक प्रीपेड सिम ले लें। तो दोस्तो समझ आ गया होगा कि कैसे यात्रा की तैयारी करनी है। जी, हाँ अब थोड़ा और समझते है। इसके लिये हमें सुरूआत में पहुँचना होगा। आईये समझते हैं।
     यदि आप ट्रेन से जा रहे हैं तो आपको जम्मू या उधमपुर रेलवे स्टेशन पर उतरना पडेगा। इसके आगे की बालटाल की यात्रा बस या टेक्सी के माध्यम से करनी पडेगी। जम्मू से बालटाल की दूरी लगभग 340 कि0मी0 है जिसे आप लगभग 10-12 घंटे में तय कर लेंगे, उधमपुर से बालटाल की दूरी लगभग 275 कि0मी0 है जिसे आप 8-10 घंटे में तय कर लेंगे। यदि आप हवाई जहाज से जा रहे हैं तो आपको श्रीनगर तक जाना चाहिये। श्रीनगर से बालटाल तक टेक्सी या बस लेनी पडे़गी। श्रीनगर से बालटाल की दूरी लगभग 90 कि0मी0 है यह दूरी आप लगभग 3-4 घंटे मेें तय कर लेंगे।
     आप कहीं से भी सड़क मार्ग से बालटाल जाते हैं तो आपको रास्ते में जगह-जगह भण्डारे/कैंप मिल जायेंगे वहाँ आप निशुल्क ठहर सकते हैं और भोजन कर सकते हैं। इसके अलावा आपको होटल भी मिल जायेंगे।
    आपको अपने साथ घर से गरम कपडे (स्वेटर लोई साल मफलर), रेनकोट, धूप का चश्मा, मास्क, जूते (जो वर्फ पर चलने पर फिसले न), आईडी, मेडिकल किट, यात्रा पंजीकरण एवं टिकित इत्यादि को ध्यान से रख लेना चाहिये। इसके अलावा घर से खाने पीने के लिये दो-तीन दिन के हिसाव से सूखा मेवा, वेसन का नमकीन, सूखा मीठा जो खराब न हो जरूर रख लेना चाहिये क्योंकि पहाड़ों में कभी-कभी मौसम परेशान करता है इसलिये यह बहुत आवश्यक सामग्री है।
    यात्रियों को कोविड-19 के लिए रापिड एंटीजन टेस्ट के लिए नेगेटिव सर्टिफिकेट प्रदान करना होगा। टेस्ट यात्रा के 48 घंटे पहले का होना चाहिए। वेवसाईट पर जरूर चेक करें।
    ओके, दोस्तो अब आपकी यात्रा की पूरी तैयारी हो गयी। चलते है अगले बिन्दु पर।

amarnaath yatra

4-श्री अमरनाथ यात्रा किस साधन से करना चाहिये-
    श्री अमरनाथ जी की यात्रा जम्मू या उधमपुर तक ट्रेन से करनी चाहिये। टेªन का समय ऐसा होना चाहिये कि आपको 12 बजे दिन के पहले-पहले जम्मू या उधमपुर पहुँचा दे।
     उसके बाद बालटाल तक टेम्पो ट्रेवलर, टेक्सी या बस से यात्रा करनी चाहिये।
आपको सड़क मार्ग की यात्रा बालटाल के लिये तुरन्त प्रारम्भ कर देनी चाहिये जिससे आपका सफर कुछ कम हो जाये। जहाँ भी आपको रात्रि होने लगे वहीं पर किसी भण्डारे में पहुँचकर रात्रि भोजन करके सो (ठहर) जाना चाहिये। सुबह जल्दी तैयार होकर पुनः यात्रा प्रारम्भ कर देनी चाहिये जिससे आप सायं होने से पहले बालटाल पहुँच सकें। बालटाल पहुँचने के पहले आपको कई जगह अपनी आईडी और अमरनाथ यात्रा का रजिस्ट्रेशन दिखाना पडेगा इसलिये आप रजिस्ट्रेशन अपनी जेब में रख लें एवं बालटाल के आस पास आपको अपना पूरा लगेज चैक कराना पड़ेगा। इसलिये सड़क मार्ग यात्रा में अधिक समय लग जाता है।
बालटाल से अमरनाथ गुफा तक घोड़े से ही जाना चाहिये कयोंकि रास्ता बहुत कीचड़ बाला हो जाता है। घोडे़ से उतरने के बाद अमरनाथ गुफा तक के लिये पालकी अवश्य लेनी चाहिये क्योंकि आक्सीजन कम होने की बजह सेे आपकी सांस फूलने लगेगी। बालटाल से गुफा तक पैदल यात्रा न करें तो झमझदारी कहलायेगी आपकी। इसके लिये हमने उपरोक्त बिन्दु में विस्तृत तैयारी में आपको अच्छे से समझा दिया है। अब आप पूर्णतः समझ गये होंगे कि किस साधन से यात्रा करनी है।
5-श्री अमरनाथ यात्रा के समय कहाँ ठहरें और क्या खायें-
     दोस्तो यात्रा के समय यदि ठहरने और खाने का पुख्ता इंतजाम मिल जाये तो यात्रा सुगम और आनन्दमयी हो जाती है। इसलिये यह बहुत ही महत्वपूर्ण बिन्दु है।
    यहाँ पर मैं अपने तीन बार की अमरनाथ यात्रा का पूरा अनुभव बताने जा रहा हूँ।
यात्रा के समय मैं कानपुर उ0प्र0 में रहता था। एवं उ0प्र0 सरकार का नोकर था। कानपुर में घंटाघर क्षेत्र में मेरी तैनाती थी। मेरे विभाग से सम्बन्धित श्री बब्लू अग्रवाल जी प्रत्येक वर्ष अमरनाथ यात्रा पर ग्रुप लेकर जाते थे। ग्रुप में लगभग 20 से 30 मेंम्बर हो जाते थेे। मेरे मन में भी श्री अमरनाथ यात्रा पर जाने की जिज्ञासा उत्पन्न हो गई। भगवान भोले नाथ बाबा बरफानी ने सब व्यवस्था कर दी। श्री अग्रवालजी ने मेरी जाने की पूरी योजना तैयार कर दी मैं उनके ग्रुप में श्री अमरनाथ के लिये चल दिया। और मैने उनके साथ लगातार तीन बार अमरनाथजी की यात्रा की।
     तीनों बार मेने अलग अलग तरीके से यात्रा की पहली बार ट्रेन से जम्मू उतरा वहाँ से टेम्पो ट्रेवलर से बालटाल तक सड़क यात्रा की रास्ते में कैम्प में रूका वहीं पर गरमागरम चपाती के साथ रात्रि भोजन किया दूसरे दिन जल्दी तैयार होकर बालटाल के लिये चल दिया सायं को बालटाल पहुँच गया। बालटाल में दिल्ली बालों के कैम्प में रहा। खाने पीने और ठहरने की अब्बल व्यवस्थ देखकर तवियत खुश हो गयी। जो मर्जी सो खायिये इतने व्यंजन मैंने शादी पार्टियों में भी नहीं देखे थे। बहुत ही आनन्द आया। उसी दिन श्री बब्लू अग्रवालजी ने घोडे़ की बुकिंग कर दी थी। अगले दिन सुबह जल्दी 3 बजे उठकर फ्रेस होकर गरम पानी से स्नान कर लिया और पवित्र गुफा जाने के लिये तैयार हो गया। सुबह से ही चाय नास्ता तैयार था नास्ता चाय करने के बाद अपना रजिस्ट्रेशन, आईडी, मोवाईल गरम कपड़े पहनने के बाद रेनकोट, और मास्क पहन कर बाबा वरफानी के दर्शन के लिये घोडे़ पर सवार होकर गुफा की ओर चल दिया रास्ते का दृष्य अदभुद था कहीं वर्फ कहीं वारिस कहीं झरने संकीर्ण रास्ता आने जाने का फिर भी सब अच्छे से आ-जा रहे थे। बाबा के जयकारे की गूँज चारों तरफ से सुनायी पड़ रही थी। पता ही नहीं चला की कब गुफा के बाहर पहुँच गया इसके बाद घोड़े ने उतार दिया तुरन्त पालकी की 1000 रूपया में जिसने मुझे गुफा तक पहुँचा दिया। पवित्र गुफा में बाबा वर्फानी के दर्शन हो गये पूरा शिवलिंग था, कबूतर के भी दर्शन हुए गुफा के आस पास चारों तरफ वर्फ-ही-वर्फ थी। अलग अनुभव हुआ दर्शन के बाद जैसे ही सीड़ियों से नीचे आया तुरन्त राजमा चावल मिल गया। राजमा चावल इतना स्वादिष्ट था कि उसके पहले मैंने ऐसा व्यंजन कभी नहीं खाया था। आनन्द आ गया मुझे तो। इसके बाद पालकी वालों ने मुझे घोडे़ के पास छोड़ दिया और घोड़ा बाला वापस बालटाल के चल दिया दिन में 3 बजे में वापस बालटाल कैम्प आ गया। साथी लोग कुछ मिले कुछ विछुडे़ कुछ अगले दिन आये। कैम्प पहुँच गये अलग अलग समय पर सभी। सुझाव यात्रा के समय पानी जरूर पीते रहें।
     अगले दिन ग्रुप से अलग होकर सुबह-सुबह मैं श्रीनगर के लिये अकेला चल दिया क्योंकि वापिसी में मेरी टिकिट श्रीनगर से लखनऊ हवाई जहाज से थी। श्रीनगर में डल झील में हाऊस वोट में रहा बहुत सारे गार्डन मार्केट इत्यादि घूमें, बहुत आनन्द आया। अगले दिन हवाई जहाज से श्रीनगर से लखनऊ आ गया सायं को कानपुर पहुँच गया। कुल मिलाकर 5 दिन में श्री अमरनाथ यात्रा सम्पन्न हो गयी।
     दूसरी बार मैं दोनों तरफ से हवाई जहाज से दिल्ली से श्रीनगर, श्रीनगर से दिल्ली गया था। 3 दिन में यात्रा सम्पन्न हो गयी।
तीसरी बार ट्रेन से उधमपुर वापसी हवाई जहाज से श्रीनगर से लखनऊ। यह यात्रा 4 दिन में पूर्ण हो गयी थी।
मैने भी कई लोगों को श्री अमरनाथ यात्रा में सामिल किया और सभी को बहुत आनन्द आया। इसीलिये यह लेख लिख दिया कि अधिक से अधिक लोग प्रभावित हों और श्री अमरनाथ जी की यात्रा करें। लेख महत्वपूर्ण है। कृपया अधिक से अधिक लोगों को शेयर जरूर करें।
सभी पाठकों को जय सियाराम जय हनुमान। 
लेखक-अनिल यादव।

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