यहाँ लोगों की जानकारी के लिये अधिमास में देने योग्य कुछ वस्तुओं के नाम दे रहे हैं। जिनमें छिद्र वाले रसीले पदार्थों का विशेष महत्व बताते हैं। वैसे मिठाई कोई भी हो मीठी मलाई पूरी या माल पूआ, जलेबी, इमरती आदि के 32 नग पूरे अधिमास भर किसी बर्तन में रखकर उस पर दक्षिणा रखकर हाथ में जल लेकर भगवान के अर्पण करके वैष्णव भक्त ब्राह्मण को नित्य दे यदि इतना करने की गुंजाइश न हो तो पुरुषोत्तम मास की समाप्ति होने से पहले 32 मिठाई के नग एक बर्तन में दक्षिणा सहित दान देवे । अथवा जो भी ऋतुफल हो उसके 32 नग के हिसाब से उपरोक्त विधि से देवे अथवा मेवा देनी हो तो मेवा के भी 32 नग दे जैसे काजू, पिस्ता, किसमिस, बादाम, छुआरे आदि इनमें से किसी एक मेवा को बदल-बदल कर अथवा बिना बदले लेवे और उपरोक्त विधि से ही जिसकी जैसी गुंजाइश हो उसी प्रकार करे । इनके अलावा यदि हो सके तो भगवान के मन्दिर में या घर में रोज उत्सव तथा भण्डारे करावे ।

जय सियाराम जय हनुमान जय गुरूदेव।

लेखक अनिल यादव।

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