अभ्यगमाचरेन्नित्यं सं जराश्रमवातहा।

दृष्टिप्रसादपुष्टश्यायुः स्वप्नसुत्वक्त्वदाढर्यकृत्।।

शिरःश्रवणपादेषु तं विशेषेण शीलयेत्।

अपने शरीर के विविध अंगों पर प्रतिदिन तेल की मालिश करनी चाहिये। अभ्यंग करते रहने से जरा (बुढ़ापा), थकावट एवं विकृत वात (रोगों)-का विनाश होता है। दृष्टि की स्वच्छता, शरीर की पुष्टि और आयुकी वृद्धि होती है। अभ्यंग करने से नींद अच्छी आती है, त्वचा सुन्दर हो जाती है तथा शरीर एवं उसके सभी अंग सुदृढ़ हो जाते हैं। सिर, कान तथा पाँवों में अधिकतर मालिश करनी चाहिये। बहुत फायदा होता है।
लेखक- अनिल यादव।

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