lord hanuman

एक दिन श्री हनुमान जी को बहुत तेज भूख लगी। बजरंगबली महावीर हनुमानजी बहुत ही सहज सरल और भोले हैं। इनके भोलेपन एवं श्री रघुनाथजी के चरण कमलों में इनकी अदभुद प्रीति की अनेक कथायें प्रचलन में हैं इन्हीं में से एक कथा जो विश्वविख्यात है उसके बारे में बताने जा रहा हॅू। भूख के कारण श्री हनुमान जी अपनी माता जगत जननी जानकी जी के पास निसंकोच पहॅंुच गये और माता से कहने लगे की माता मुझे भूख लगी है कुछ कलेवा दे दीजिये।

भगवान श्री राम के अनन्य भक्त हनुमानजी की माता सीता के चरणों अपार भक्ति है और माता सीता इन्हें प्राण-तुल्य प्यार करती हैं, इस कारण ये माताजी से तनिक भी संकोच नहीं करते। माता से संकोच भी कैसा?

यह बात मंगलवार प्रातःकाल की है। श्री हनुमानजी माता के पास सीधे पहुॅचकर बोले-‘माॅं! मुझे भूख लगी है। कलेवा के लिये कुछ दीजिये।

’‘बेटा! मैं अभी स्नान करके तुम्हें मोदक देती हॅू।’ माता के वचन सुन हनुमानजी प्रभु श्री राम का नाम-जाप करते हुए माता के स्नान कर लेने की प्रतीक्षा करने लगे।

जगतजननी सीता ने स्नान करने के बाद श्रृंगार करना प्रारम्भ किया। माता की माॅंग में सिन्दूर देखकर भोले हनुमानजी ने पूछा-‘माताजी! आपने यह सिन्दूर क्यों लगाया है?’

माता जानकी को हॅंसी आ गयी। हॅंसते हुए उन्होंने हनुमानजी को उत्तर दिया। उत्तर क्या दिया, जैसे वे छोटे अबोध शिशु को बहला रहीं थीं। बोलीं-‘इस लाल सन्दिूर को लगाने से तुम्हारे स्वामी की आयु-वृद्धि होती है।’

‘सिन्दूर लगाने से मेरे स्वामी की आयु बढ़ती है।’ हनुमानजी मन-ही-मन सोचने लगे और बहुत देर तक सोचते रहे। वे एक दम सहम गये। और ढूॅंढकर अपने पूरे शरीर मे ंतेल लगाये, उसके बाद सिन्दूर पोत लिये। श्री हनुमानजी का सर्वांग सिन्दुरारूप हो गया, जैसे उन्होंने सिन्दूर में स्नान किया हो। मेरे इस सिन्दूर-लेप से मेरे प्रभु की आयु वृद्धि हो जायगी, इस हर्षोल्लास में उन्हें अपनी क्षुधा (भूख) का भी ध्यान नहीं रहा।

श्री हनुमानजी सीधे प्रभु श्री रामजी की राज-सभा में पहुॅंचे ही थे कि उन्हें इस सिन्दूरपूरितांग अदभुद वेष में देखकर वहाॅ जोरका अट्टहास हुआ। स्वयं भगवान श्री राम भी मुस्कुरा उठे। वे हनुमान जी से पूछ बैठे-‘हनुमान! आज तुमने सर्वांग में सिन्दूर लेप कैसे कर लिया?’

सरल हनुमानजी ने हाथ जोड़कर विनम्रतापूर्व उत्तर दिया-‘प्रभु! माताजी के तनिक-सा सिन्दूर लगाने से आपकी आयु में वृद्धि होती है, यह जानकर आपकी अत्यधिक आयु-वृद्धि के लिये मैंने समूचे शरीर में सिन्दूर लगाना प्रारम्भ कर दिया है।’
श्री राघव हनुमानजी के सरल भावपर मुग्ध हो गये। उन्होंने घोषणा कर दी-‘आज मंगलवार है। इस दिन मेरे अनन्यप्रीतिभाजन महावीर हनुमान को जो तेल और सिन्दूर चढ़ायेंगे, उन्हें मेरी प्रसन्नता प्राप्त होगी और उनकी समस्त ककामनाओं की पूर्ति हो जाया करेगी।’ तभी श्री हनुमान जी ने प्रभु के दोनों चरण-कमलों को पकड़ लिया। यह कथा आपको कैसी लगी कमेंट जरूर करें, जिससे मुझे लिखने की और ताकत मिलेगी। श्री हनुमानजी की महाबीरी लगाने की जानकारी अधिक से अधिक लोंगो के शेयर कीजिसे जिससे लोगों का कल्याण हो सके।

कथा का अन्ति सारान्स यही है कि प्रत्येक व्यक्ति को श्री हनुमान जी महाराज को मंगलवार के दिन (महाबीरी) चमेली का तेल और सिन्दूर चढ़ाना चाहिये। समस्त मनोकामनायें पूर्ण हो जायेंगी। धन्यवाद।

श्री हनुमान भक्तों को मेरा सादर –जय जय सीताराम।

लेखक-अनिल यादव।

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