hanuman garhihanuman garhi photo
1– श्री हनुमानगढ़ी में जब आप दर्शन करते हैं तो आपको हनुमान जी के मुखारविन्द के दर्शन हुये होंगें, लेकिन यहाॅ पर श्री मारूतिनन्दन की एक और मूर्ति है। वह कैवल छः इंच ऊॅची है सदा पुष्पाच्छादित (फूलों से ढ़की) रहती है। इसलिये दर्शन नहीं होते। कृपया पूरा जरूर पढें।
2– श्री हनुमानगढ़ी के दक्षिण में सुग्रीव-टीला और अंगद-टीला नामक स्थान है।
3- श्री हनुमानगढ़ी की स्थापना लगभग 300-325 वर्ष पूर्व स्वमी श्री अभयरामदास जी ने की थी, श्री निर्वाणी अखाड़ा द्वारा यहाॅं विधिवत् पूजा-आराधना एवं भोग-राग की व्यवस्था मर्यादित रूप से की जाती है।
कृपया पांचों बिन्दु जरूर पढ़ें।
4- एक बार लखनऊ तथा फैजाबाद के प्रशासक नवाब के पुत्र को रोग से भयंकर दर्द हो गया। डाक्टर, वैद्य और हकीमों के उपचारों से जब उनकी व्याधि नहीं मिटी, तब वे हनुमानगढ़ी के श्री हनुमामान जी की शरण में आये और अविलम्ब उन्हें उस भीषण रोग से मुक्ति मिल गयी। और श्री हनुमान जी के प्रति अथाय श्रद्धा जाग गयी इसलिये नवाब ने वहाॅ निकटतम स्थान की 52 वीघा जमीन मन्दिर को दान कर दी थी। आज भी मुसलमान बन्धु यहाॅ आकर श्रद्धापूर्वक पूजा-भेट अर्पित करते हैं। अनेक मुसलिम संत श्री हनुमानजी की कृपा पाकर कृत्य कृत्य हुए और अवध में वस गये।
       मैं एक ऐसा उदाहरण देना चाहता हॅू जो मेरे मन में हमेशा रहता है। अमृत रामकथा वाचक ब्रह्मलीन श्री राजेश्वरानन्द जी महाराज मुसलमान परिवार से ताल्लुक रखने के बाद भी श्री हनुमान जी के अनन्य भक्त थें। श्री राजेश्वरानन्द जी महाराज की कथा पूरे संसार में विख्यात हैं जिसे सुनकर लोग गद गद हो जाते है, श्रोताओं के प्रेमाश्रु बहने लगते है।
5- श्री हनुमानगढ़ी के हनुमान जी के दर्शन के लिये श्रद्धालुओं का नित्य मेला सा लगा रहता है और यह कहना भी अधिक नहीं होगा कि श्री हनुमान जी की जितनी पूजा होती है उतनी सायद युगल सरकार की भी न होती हो।
अन्तिम सारान्स यही है कि जो भी इस संसार सागर में जन्म लेकर आया है, उसे श्री हनुमान जी भक्ति प्राप्त हो।
सभी पाठक बन्धुओं को मेरा हृदय से – जय सियाराम जय हनुमान 
लेखक – अनिल यादव
One thought on “श्री हनुमानगढ़ी अयोध्या के पाॅच रहस्य/चमत्कार क्या आप जानते है? लखनऊ, फैजाबाद के नवाब श्री मंसूरअली ने 52 वीघा जमीन क्यों दान की थी?”

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